Tuesday, March 26, 2013

आस



आंधी आयी पुष्पकंवल में लहरें ये तैयार है
तूफानों को चीर के निकला आगे ये संसार है |
जीवन एक चुनौती जिसका दिल ही हथियार है
दिल में जीत कि आस लिए वो कबसे बेकरार है |१|

हार कभी ना सोंचनेवाला डटकर सहे वो आंधी को
ठिठुरती वो हथेली जैसे चूम रहा मेघडंबर को |
टस से मस ना होगा वो मन पूछ रहा तैयार है
दिल में जीत कि आस लिए वो कबसे बेकरार है |२|

धुल कि चादर ओढ़ के तन पे क्यूँ ये ब्यथा सुनाती है
चिंगारी से आग निकलकर जैसे सबको सताती है |
हुआ मुखातिब फिर वो जहाँ से फिर भी वही सवाल है
दिल में जीत कि आस लिए वो कबसे बेकरार है |३|

नयनपटल में झाँक के देखा ,दिखा उसे ब्रहमाण्ड का साया
पल में किट पल में पतंग पल में उसने खुद को पाया |
जीवन व्यर्थ चला था अबतक मिलने को तैयार है
दिल में जीत कि आस लिए वो कबसे बेकरार है |४|