सागर के तट पे भी
था मैं बेचैन
उठ रहे ज्वारभाटों को देखकर
मन में आ गया था एक तूफ़ान
पूछने लगा था खुद से ही
क्या होती है उम्मीद की परिभाषा
वो समंदर के लहरों की तरह
या होती है एक आजाद पक्षी की तरह
या एक शांत जल की तरह
जो होती है खुद में कैद
क्यूँ रखते हैं उम्मीद इन लहरों से
जैसे ये कभी विनाश नहीं
जैसे ये दिल रखता है
किसी के नहीं रूठने की उम्मीद
पर ये विनाश क्यूँ
ख्वाबों के पूल का ये अंश क्यूँ
नहीं झेला जाता मुझसे अब
ये तूफानी विनाश
ये रूठने मानाने का सिलसिला
पर पता नहीं क्यूँ
रूक जाता है मन एक उम्मीद पर
कहीं फिर वो हमे अपना बनालें
अब ये तूफानी लहरें बहार क्यूँ
पहुँच गए हैं अब यहाँ
लोगों की जिंदगी जो हरियाली थी
क्यूँ उजाड़ रहे हैं
मेरे अपने अब तुम संभल जा
मत मान ये लहरें की बातें
नहीं बदला हूँ अब भी बदल गया है मौसम
मत बहकना ये मौसम में आकर
मेरा मन अब भी नहीं जानता उम्मीद की परिभाषा
जो छूटने वाली है तुमसे ये उम्मीद
न छूटने देना जो दिल में है तरी तस्वीर