विचारों की लेनदेन हो गयी थी बंद जब हो गया था एक वस्तु निराधार
अब लाने की बारी थी पर आलस्य कम न था और धुप की थी बौछार
जैसे तैसे जगी हिम्मत जब मिला एक किनारा, फिर हो चली थी तैयार
अगले दिन थी जो ख़ुशी का त्यौहार दो सालों बाद मिल रहा था परिवार |
अब लाने की बारी थी पर आलस्य कम न था और धुप की थी बौछार
जैसे तैसे जगी हिम्मत जब मिला एक किनारा, फिर हो चली थी तैयार
अगले दिन थी जो ख़ुशी का त्यौहार दो सालों बाद मिल रहा था परिवार |
पर अफ़सोस !!! नहीं कर सका उसका छोटा सा कार्य जो था अपरिहार्य
वो किनारा भी छुट गया था पर शायद उसे उम्मीद उसी से थी
पर वक़्त को तो आना ही था और आ ही गया पर सामने था दीवार
पाँव कट गए थे पर मुख पर मुस्कान जिम्मेवारी तो समझ रखा था |
वो किनारा भी छुट गया था पर शायद उसे उम्मीद उसी से थी
पर वक़्त को तो आना ही था और आ ही गया पर सामने था दीवार
पाँव कट गए थे पर मुख पर मुस्कान जिम्मेवारी तो समझ रखा था |
कदम चल रहे थे बेचैनी बढ़ रहे थी छूटने के डर से कर रहे थे प्रयास
पर हुए नाकाम !!! उसके मन में थे आंसू, आँखों में आने को था बेक़रार
मजबूत हुआ करती थी पर अन्दर से टूट चकी थी कुछ सुन नहीं पा रही थी
वापस जा रही थी, जहाँ नहीं जाना चाहती थी, शायद मैं ही था गुनाहगार |
पर हुए नाकाम !!! उसके मन में थे आंसू, आँखों में आने को था बेक़रार
मजबूत हुआ करती थी पर अन्दर से टूट चकी थी कुछ सुन नहीं पा रही थी
वापस जा रही थी, जहाँ नहीं जाना चाहती थी, शायद मैं ही था गुनाहगार |
पर अचानक उपरवाले ने हमे दिखाया, हमारी करुण स्वर सुना, किया उद्धार
मार्ग मिल गया था उसे, अब पहुँचने को होगी, वो पहुँच गयी मिल गया परिवार |
मार्ग मिल गया था उसे, अब पहुँचने को होगी, वो पहुँच गयी मिल गया परिवार |