Wednesday, November 13, 2013

थोडा सा और जी लेने दो


खो गया था मैं पता नहीं किस गहराई में
भटक गया था मन लक्ष्य के विपरीत दिशा में
अब वापस आना चाहता हूँ वो बुलंदियों के लिए
बदलना चाहता हूँ सपनो के दुनिया को हकीकत में
अब थोडा सा और जी लेने दो
वो आसमां है ऊपर अब छू लेने दो |

सपनों के दुनिया में जी रहा था ऐसे
उम्मीद और हौसला था दुनिया जीत लेंगे
हकीकत का पर्दा अब उठ गया, हो गया आरपार
दिल में कुछ धड़कन बंकि है और सांस रुक गयी है
अब थोडा सा और जी लेने दो
वो आसमां है ऊपर अब छू लेने दो |

बिखर चूका हूँ मैं फिर भी सिमटना चाहता हूँ
जिंदगी उजाड़ चुकी है फिरसे बसना चाहता हूँ
काश वो पल वापस आ जाये और बदल दूँ उसको
बस कुछ उम्मीद बची है और फिर बुझ जाऊं हमेशा के किया
अब थोडा सा और जी लेने दो
वो आसमां है ऊपर अब छू लेने दो |